हरियाणा को आमतौर पर एक प्रगतिशील राज्य माना जाता है। खेती, खेल, सेना, उद्योग और अब शिक्षा के क्षेत्र में भी यह राज्य देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाने लगा है। लेकिन इसी विकसित हरियाणा के भीतर एक ऐसा इलाका भी है, जहाँ आज़ादी के 75 साल बाद भी शिक्षा की रोशनी पूरी तरह नहीं पहुँच पाई। यही इलाका है मेवात, जिसे अब आधिकारिक रूप से नूह जिला कहा जाता है। सरकारी जनगणना और प्रमाणिक आंकड़ों के अनुसार, मेवात (नूह) हरियाणा का सबसे कम साक्षरता वाला यानी सबसे अनपढ़ जिला है।
भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, हरियाणा की कुल साक्षरता दर लगभग 75.55 प्रतिशत है। पुरुषों की साक्षरता दर 84 प्रतिशत से अधिक है, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 66 प्रतिशत के आसपास है। लेकिन जब हम जिलावार आंकड़ों पर नज़र डालते हैं, तो यह अंतर और भी गहरा दिखाई देता है। मेवात जिले की साक्षरता दर केवल लगभग 54 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पूरे हरियाणा में सबसे कम है। यानी इस जिले में लगभग हर दूसरा व्यक्ति पढ़ना-लिखना नहीं जानता। यह आंकड़ा न केवल राज्य के औसत से बहुत नीचे है, बल्कि राष्ट्रीय औसत से भी काफी कम है।
साक्षरता के आंकड़े — लगभग 2026 स्थित आंकड़े
हरियाणा के अधिकतम और न्यूनतम साक्षरता वाले जिलों की तुलना इस प्रकार दिखती है:
जिला
साक्षरता दर (लगभग)
गुरुग्राम
84.70%
पंचकुला
81.88%
अंबाला
81.75%
फरीदाबाद
81.70%
सिरसा
68.82%
फतेहाबाद
67.92%
मेवात (नूह)
54.08% (सबसे कम)
मेवात जिला हरियाणा के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसकी सीमाएँ राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश से लगती हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से “मेवाती क्षेत्र” के नाम से जाना जाता रहा है। यहाँ की सामाजिक संरचना, भौगोलिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियाँ शुरू से ही हरियाणा के अन्य हिस्सों से अलग रही हैं। यही अलगाव धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन का कारण बनता चला गया।
अगर हम मेवात की सामाजिक तस्वीर देखें, तो यहाँ की आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है। खेती और मजदूरी यहाँ के लोगों की मुख्य आजीविका रही है। गरीबी और सीमित संसाधनों के कारण शिक्षा को लंबे समय तक प्राथमिकता नहीं मिल पाई। बहुत से परिवारों में बच्चों को कम उम्र में ही काम पर लगा दिया जाता है ताकि घर की आर्थिक मदद हो सके। ऐसे में स्कूल जाना एक “अतिरिक्त चीज़” समझी जाती रही, ज़रूरत नहीं।
मेवात की अनपढ़ता का सबसे गंभीर पहलू है महिला साक्षरता। यहाँ लड़कियों की पढ़ाई को लेकर सामाजिक सोच आज भी काफी हद तक रूढ़िवादी रही है। पारंपरिक मान्यताओं के कारण लड़कियों की शिक्षा को या तो ज़रूरी नहीं समझा गया, या फिर सीमित स्तर तक ही स्वीकार किया गया। नतीजा यह हुआ कि मेवात में महिला साक्षरता दर कई जिलों की तुलना में बेहद कम रही। जब किसी समाज की आधी आबादी शिक्षित नहीं होती, तो उसका सीधा असर पूरे क्षेत्र की प्रगति पर पड़ता है।
शिक्षा के बुनियादी ढांचे की कमी भी मेवात की अनपढ़ता का एक बड़ा कारण रही है। लंबे समय तक इस जिले में पर्याप्त स्कूल, कॉलेज, प्रशिक्षित शिक्षक और परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। कई गाँव ऐसे रहे जहाँ स्कूल तो थे, लेकिन अध्यापकों की भारी कमी थी। कहीं स्कूल दूर थे, तो कहीं सुविधाओं का अभाव था। परिणामस्वरूप बच्चों का स्कूल छोड़ देना आम बात बन गई।
मेवात में साक्षरता की कमी का असर सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। इसका प्रभाव यहाँ के रोज़गार, स्वास्थ्य, और सामाजिक जागरूकता पर भी साफ दिखाई देता है। कम पढ़े-लिखे लोग बेहतर नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते, जिससे बेरोज़गारी और गरीबी का दुष्चक्र बना रहता है। शिक्षा की कमी के कारण स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी कम रहती है, जिससे कुपोषण, मातृ-शिशु मृत्यु दर और अन्य सामाजिक समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
अगर मेवात की तुलना हरियाणा के अन्य जिलों से करें, तो अंतर और स्पष्ट हो जाता है। गुरुग्राम, पंचकुला, अंबाला और फरीदाबाद जैसे जिलों में साक्षरता दर 80 प्रतिशत से ऊपर है। वहीं मेवात लगभग 54 प्रतिशत पर ही ठहरा हुआ है। यह अंतर केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि विकास की गति का अंतर है।
हालांकि यह कहना गलत होगा कि मेवात में सुधार के प्रयास नहीं हुए। पिछले कुछ वर्षों में राज्य और केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। नए स्कूल, कॉलेज, आईटीआई और छात्रावास खोले गए हैं। लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति योजनाएँ, मुफ्त किताबें, साइकिल योजना और मिड-डे मील जैसी योजनाओं को सक्रिय रूप से लागू किया गया है। इसके बावजूद सामाजिक सोच में बदलाव एक धीमी प्रक्रिया है, और इसका असर धीरे-धीरे ही दिखाई देता है।
मेवात की कहानी हमें यह सिखाती है कि अनपढ़ता केवल स्कूल न होने से नहीं आती, बल्कि इसके पीछे सामाजिक सोच, आर्थिक मजबूरी और ऐतिहासिक उपेक्षा जैसे कई कारण होते हैं। जब तक समाज शिक्षा को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा नहीं मानेगा, तब तक सरकारी योजनाएँ भी सीमित प्रभाव ही दिखा पाएँगी।
आज ज़रूरत इस बात की है कि मेवात जैसे जिलों में शिक्षा को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बनाया जाए। माता-पिता को यह समझाना होगा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि बेहतर जीवन, स्वास्थ्य और सम्मान की कुंजी है। खासकर लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान देना मेवात के भविष्य को बदल सकता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि मेवात (नूह) हरियाणा का सबसे कम साक्षरता वाला जिला है, लेकिन यह स्थायी सच्चाई नहीं है। सही नीतियाँ, सामाजिक जागरूकता और निरंतर प्रयास इस तस्वीर को बदल सकते हैं। जिस दिन मेवात की गलियों में स्कूल जाते बच्चों की संख्या काम पर जाते बच्चों से ज़्यादा होगी, उसी दिन यह जिला “सबसे अनपढ़” नहीं, बल्कि सबसे तेज़ी से बदलता हुआ जिला कहलाएगा।
सबसे अनपढ़ जिला:
मेवात (Nuh District), जिसकी साक्षरता दर लगभग 54.08% है — हरियाणा में सबसे कम स्तर पर।
मेवात (Nuh District), जिसकी साक्षरता दर लगभग 54.08% है — हरियाणा में सबसे कम स्तर पर। मुख्य वजहें:
सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन, पारंपरिक सामाजिक संरचना, महिला साक्षरता में कम स्तर, और बेसिक शिक्षा तक पहुँच की कमी।
सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन, पारंपरिक सामाजिक संरचना, महिला साक्षरता में कम स्तर, और बेसिक शिक्षा तक पहुँच की कमी। प्रभाव:
रोजगार की कमी, स्वास्थ्य जागरूकता में कमी, और सामाजिक प्रगति के अवसरों में बाधा।
रोजगार की कमी, स्वास्थ्य जागरूकता में कमी, और सामाजिक प्रगति के अवसरों में बाधा। उपाय:
शिक्षा के अवसर बढ़ाना, लड़की शिक्षा को प्रोत्साहित करना, और स्थानीय सामाजिक समर्थन को सशक्त बनाना।
शिक्षा के अवसर बढ़ाना, लड़की शिक्षा को प्रोत्साहित करना, और स्थानीय सामाजिक समर्थन को सशक्त बनाना।





