हरियाणा राज्य का गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब से अलग होकर हुआ और तभी से इस राज्य की राजनीति ने कई उतार-चढ़ाव देखे। हरियाणा के विकास, प्रशासनिक ढांचे और सामाजिक-आर्थिक दिशा को तय करने में यहां के मुख्यमंत्रियों की भूमिका बेहद अहम रही है। अब तक हरियाणा को अलग-अलग विचारधाराओं, पृष्ठभूमियों और नेतृत्व शैली वाले मुख्यमंत्री मिले, जिन्होंने अपने-अपने समय में राज्य को नई दिशा देने का प्रयास किया।
हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा बने। उन्होंने 1 नवंबर 1966 से 23 मार्च 1967 तक तथा दूसरी बार 23 मार्च 1967 से 2 नवंबर 1967 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। वे स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी विचारधारा के नेता थे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती नवगठित राज्य का प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना था। उन्होंने चंडीगढ़ को राजधानी के रूप में स्थापित करने, सरकारी विभागों के गठन और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की नींव रखने का कार्य किया। उन्हें हरियाणा की प्रशासनिक आधारशिला रखने वाला मुख्यमंत्री माना जाता है।
1 पंडित भगवत दयाल शर्मा (1966–1967)
पंडित भगवत दयाल शर्मा हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री थे। 1 नवंबर 1966 को जब हरियाणा राज्य का गठन हुआ, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नए राज्य को प्रशासनिक रूप से खड़ा करने की थी। वे स्वतंत्रता सेनानी और गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित नेता थे। उनके कार्यकाल में चंडीगढ़ को राजधानी के रूप में स्थापित किया गया, नए विभागों का गठन हुआ और प्रशासनिक ढांचे की नींव रखी गई। शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने का श्रेय भी उन्हें जाता है। अल्प कार्यकाल के बावजूद उन्होंने हरियाणा को एक संगठित राज्य के रूप में खड़ा करने की मजबूत शुरुआत की।
2 राव बीरेंद्र सिंह (1967–1968)
राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री और पहले जाट मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रहा, फिर भी उन्होंने किसानों और ग्रामीण समाज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। भूमि सुधार, कृषि हितों और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे उनके एजेंडे में रहे। वे हरियाणा की सामाजिक संरचना को समझने वाले नेता थे, हालांकि कम समय मिलने के कारण वे बड़े फैसलों को पूरी तरह लागू नहीं कर सके।
3 चौधरी बंसी लाल (1968–1975, 1986–1987, 1991–1996)
चौधरी बंसी लाल को हरियाणा का सबसे प्रभावशाली और विकास पुरुष मुख्यमंत्री माना जाता है। वे तीन बार मुख्यमंत्री बने और सबसे लंबा प्रभावी शासन उन्होंने दिया। उनके कार्यकाल में सड़कों का जाल बिछाया गया, गांव-गांव तक बिजली पहुंचाई गई और नहरों के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया। भाखड़ा नहर प्रणाली का प्रभावी उपयोग कर उन्होंने हरियाणा को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया। ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा और औद्योगिक सोच को आगे बढ़ाने के कारण उन्हें “हरियाणा का निर्माता” कहा जाता है।
4 बनारसी दास गुप्ता (1975–1977, 1987–1989)
बनारसी दास गुप्ता दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। उनका पहला कार्यकाल आपातकाल के समय और दूसरा राजनीतिक अस्थिरता के दौर में रहा। उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता, सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने और शहरी विकास पर ध्यान दिया। स्थानीय निकायों को अधिकार देने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई फैसले लिए। उनका शासन अपेक्षाकृत शांत और संतुलित माना जाता है।
5 चौधरी भजन लाल (1979–1985, 1989, 1991)
चौधरी भजन लाल हरियाणा के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता रहे। वे कुशल प्रशासक और राजनीतिक रणनीतिकार माने जाते थे। उनके कार्यकाल में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला, रोजगार के अवसर सृजित हुए और प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिली। सामाजिक संतुलन साधते हुए उन्होंने विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई। हरियाणा की राजनीति में उनकी पकड़ और प्रशासनिक अनुभव बेहद प्रभावशाली रहा।
6 ओम प्रकाश चौटाला (1989–1990, 1990, 1991, 1999–2005)
ओम प्रकाश चौटाला चार बार मुख्यमंत्री बने। उनका सबसे लंबा कार्यकाल 1999 से 2005 तक रहा। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दी और गांवों में स्कूल खोलने, शिक्षकों की भर्ती और शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए। ग्रामीण विकास और किसान हितों की बात भी उनके शासन में प्रमुख रही। हालांकि उनके कार्यकाल पर भ्रष्टाचार और विवादों के आरोप भी लगे, जो उनकी राजनीतिक छवि का हिस्सा बने।
7 भूपिंदर सिंह हुड्डा (2005–2014)
भूपिंदर सिंह हुड्डा लगातार दो बार मुख्यमंत्री बने और उनके कार्यकाल को हरियाणा के आधुनिक विकास का दौर माना जाता है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और शहरी विकास हुआ। मेट्रो विस्तार, एक्सप्रेसवे, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति दी। खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों और सुविधाओं ने हरियाणा को खेलों में राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
8 मनोहर लाल खट्टर (2014–2024)
मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पहले गैर-जाट मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में शासन में पारदर्शिता, डिजिटल व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन पर जोर दिया गया। ऑनलाइन ट्रांसफर-पोस्टिंग, परिवार पहचान पत्र (PPP), अंत्योदय योजनाएं और ई-गवर्नेंस उनके शासन की प्रमुख पहचान रहीं। उन्होंने सिस्टम आधारित शासन को बढ़ावा दिया और सरकारी सेवाओं को तकनीक से जोड़ा।
9 नायब सिंह सैनी (2024–वर्तमान)
नायब सिंह सैनी वर्तमान मुख्यमंत्री हैं और ओबीसी वर्ग से आने वाले नेता हैं। उनका कार्यकाल अभी प्रारंभिक दौर में है, लेकिन उनका फोकस किसानों, युवाओं, पिछड़े वर्गों और सामाजिक संतुलन पर देखा जा रहा है। वे जनकल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष
हरियाणा के मुख्यमंत्रियों का यह क्रमिक इतिहास दिखाता है कि किस प्रकार अलग-अलग दौर, विचारधाराओं और नेतृत्व शैलियों ने राज्य को आकार दिया। किसी ने नींव रखी, किसी ने विकास को गति दी, किसी ने शिक्षा और खेल को पहचान दिलाई तो किसी ने पारदर्शिता और तकनीक से शासन को आधुनिक बनाया। आज का हरियाणा इन्हीं मुख्यमंत्रियों के निर्णयों, नीतियों और संघर्षों का परिणाम है, जो राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा करता है।
आइये अब आंकड़ो से जानते है हरियाणा का सबसे बढियां मुख्यमंत्री कौन है
हरियाणा का अब तक का सबसे यादगार मुख्यमंत्री: भूपेंद्र सिंह हुड्डा
हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में यदि किसी मुख्यमंत्री को सबसे अधिक विकास, स्थिरता और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए याद किया जाता है, तो उनका नाम भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रमुखता से लिया जाता है। वे दो बार—2005 से 2014—लगातार मुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में जनता के विश्वास का बड़ा प्रमाण है। उनके कार्यकाल में हरियाणा ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा, खेल और शहरी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।
आँकड़ों की बात करें तो हुड्डा सरकार के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य सड़कों का बड़ा विस्तार हुआ, रोहतक को शिक्षा-स्वास्थ्य हब के रूप में विकसित किया गया, जहाँ PGIMS जैसे संस्थान का विस्तार और आईआईएम-रोहतक, एम्स-स्तरीय सुविधाएँ स्थापित हुईं। खेलों में हरियाणा की पहचान मजबूत हुई—ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी, जिसके पीछे खेल नीतियों और स्टेडियम/अकादमियों का योगदान रहा। शहरी विकास में गुरुग्राम और फरीदाबाद को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाया गया, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े।
लोग उन्हें इसलिए याद करते हैं क्योंकि उनके कार्यकाल में स्थिर सरकार, नीतिगत निरंतरता और विकास-केंद्रित दृष्टि दिखी। किसानों, खिलाड़ियों और युवाओं के लिए योजनाएँ बनीं और लागू हुईं। समर्थक मानते हैं कि उन्होंने हरियाणा को एक आधुनिक, अवसरों से भरे राज्य की दिशा दी। यही वजह है कि आज भी राजनीतिक बहसों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम हरियाणा के सबसे सफल मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है।






