हरियाणा में मंगलवार को हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने कई जिलों में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, रेवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ समेत सात जिलों के करीब 100 गांवों में खड़ी गेहूं, सरसों और चने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर खेतों में खड़ी गेहूं की फसल हवा और ओलों की वजह से बिछ गई, जबकि सरसों और चने की फसल पर भी सीधा असर देखने को मिला है।
राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नुकसान को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का पूरा आंकलन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पटवारी और तहसीलदारों की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह स्वयं किसान परिवार से आते हैं और किसानों की परेशानियों को अच्छी तरह समझते हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार फिलहाल 1 और 2 अप्रैल को प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है, लेकिन 3 और 4 अप्रैल को एक बार फिर मौसम बदल सकता है और कुछ इलाकों में बारिश व ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
फतेहाबाद जिले के भट्टू कलां, किरढान, ढिंगसरा, हांसपुर, हिजरावां कलां, मल्हड़ और करनौली समेत कई गांवों में सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। वहीं झज्जर के रईया, डावला, हसनपुर, जहांगीरपुर और आसपास के गांवों में भी तेज बारिश और ओलों ने खेतों को प्रभावित किया है। हिसार जिले के करीब 40 गांवों में ओलावृष्टि दर्ज की गई, जहां जाखोदखेड़ा, मंगाली, सिंघरान, हरिकोट, डाबड़ा, कालवास और सिवानी जैसे क्षेत्रों में गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई किसानों ने खेतों में गिरे बड़े-बड़े ओलों को बाल्टी में भरकर प्रशासन को नुकसान की जानकारी दी।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है और ऐसी स्थिति में बारिश और तेज हवा से फसल का खेतों में बिछ जाना गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकता है। ओलावृष्टि के कारण दाने झड़ने और फसल के काले पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल पूरी तरह सूखने तक कटाई शुरू न करें, ताकि नुकसान और न बढ़े।
बारिश और ओलों के कारण प्रदेश के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे आ गया, जिससे मौसम में ठंडक महसूस की गई। रोहतक में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 4.6 डिग्री कम दर्ज किया गया, जबकि भिवानी में भी तापमान में करीब 3 डिग्री की गिरावट रही। गुरुग्राम में हालांकि प्रदेश का सबसे अधिक तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, लेकिन शाम के समय हवा में नमी और ठंडी हवाओं के कारण हल्की ठंड महसूस की गई।
रात के तापमान में भी गिरावट देखी गई है। करनाल में न्यूनतम तापमान 14.9 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस समय के औसत से कम है। हिसार और नारनौल जैसे इलाकों में भी रात का तापमान 16 से 17 डिग्री के बीच रहा। मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल की शुरुआत में अचानक आई इस ठंडक ने लोगों को फिर से हल्की गर्म कपड़ों और चादर का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया है।
इस अचानक बदले मौसम ने एक बार फिर किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जहां एक ओर फसल कटाई का समय चल रहा है, वहीं दूसरी ओर बारिश और ओलावृष्टि ने मेहनत पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। अब सभी की नजर प्रशासनिक सर्वे और सरकार द्वारा घोषित मुआवजे पर टिकी हुई है, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।





